
गंगा नदी का पानी घटा, गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पास पहुंचकर घटा, वाराणसी में लोगों को मिली राहत
वाराणसी में गंगा का जलस्तर घटा, लोगों को मिली राहत
परिचय
वाराणसी, जिसे काशी और बनारस के नाम से भी जाना जाता है, गंगा नदी के तट पर बसा भारत का सबसे पुराना और पवित्र शहर है। यहाँ गंगा का जलस्तर हमेशा ही चिंता का विषय बना रहता है, खासकर मानसून के दौरान। इस साल भी गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए 76 मीटर के चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया था, जिससे शहर में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा। हालांकि, पिछले 24 घंटों में जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को राहत मिली है।
गंगा का जलस्तर: चेतावनी बिंदु तक पहुंचने के बाद गिरावट
जुलाई 2025 में वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, जलस्तर 75.80 मीटर तक पहुंच गया था, जो चेतावनी बिंदु (76 मीटर) से बहुत करीब था। इससे पहले 2024 में भी गंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था, जिससे कई घाटों पर पानी चढ़ गया था।
हालांकि, पिछले कुछ घंटों में जलस्तर में 10 सेमी की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग और जल संसाधन विभाग के अनुसार, यह गिरावट हरिद्वार और देवप्रयाग जैसे ऊपरी क्षेत्रों में बारिश कम होने के कारण हुई है।
प्रशासन की तैयारियाँ और सतर्कता
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वाराणसी प्रशासन ने कई कदम उठाए थे:
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NDRF और SDRF की टीमों को तैनात किया गया – बाढ़ की स्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों को सक्रिय किया गया।
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घाटों पर बैरिकेडिंग – दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और अस्सी घाट जैसे प्रमुख स्थानों पर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया।
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नाविकों को अलर्ट किया गया – गंगा में बढ़ते बहाव के कारण नावों और शिकारों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए।
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राहत शिविर तैयार किए गए – निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था की गई।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
गंगा के जलस्तर में गिरावट से स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और साधु-संतों को राहत मिली है। अस्सी घाट के पास रहने वाले एक दुकानदार रामकिशन यादव ने बताया,
“पिछले कुछ दिनों से डर लग रहा था कि बाढ़ आ जाएगी। हमारी दुकानें डूब जाएंगी, लेकिन अब पानी उतर रहा है, तो थोड़ी राहत मिली है।”
वहीं, मणिकर्णिका घाट पर पुजारी पंडित विश्वनाथ मिश्रा ने कहा,
“गंगा मैया की कृपा से इस बार भी बाढ़ का संकट टल गया। लेकिन अभी मानसून चल रहा है, इसलिए सतर्कता जरूरी है।”
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अभी भी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। नेपाल की तराई में हो रही बारिश का असर गंगा और उसकी सहायक नदियों पर पड़ सकता है। इसलिए, जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है।
गंगा के जलस्तर में गिरावट के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा के जलस्तर में गिरावट के मुख्य कारण हैं:
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पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश कम होना – उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश की तीव्रता में कमी आई है।
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जलाशयों से पानी छोड़ने में कमी – टिहरी बांध और अन्य जलाशयों से पानी का निकास कम किया गया है।
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गंगा के ऊपरी क्षेत्रों में जल प्रवाह सामान्य होना – हरिद्वार और ऋषिकेश में नदी का प्रवाह स्थिर है।
भविष्य में क्या हो सकता है?
हालांकि जलस्तर अभी घट रहा है, लेकिन मानसून सीजन अभी जारी है। अगस्त तक और बारिश होने की संभावना है, जिससे गंगा का स्तर फिर से बढ़ सकता है। इसलिए, प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
निष्कर्ष
वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पास पहुंचने के बाद अब घटने लगा है, जिससे लोगों को राहत मिली है। हालांकि, मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए सतर्कता बरतना जरूरी है। प्रशासन ने पहले से ही सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं, लेकिन आम नागरिकों को भी सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए।
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अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। आधिकारिक अपडेट के लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) और IMD की वेबसाइट देखें।